वह परमात्मा तब भी था। जब हम नहीं थे। और अभी भी है। जब हम है। और तब भी रहेगा। जब हम नहीं होगें। आज हमारे जीवन में जो कुछ भी हो रहा है या होगा। वह हमेशा भगवान की इच्छा से होता है। हम इंसानों के सोचने से कुछ नहीं होता। और ना कभी हो सकता है।
"जो कुछ भी हो रहा है। भगवान का इच्छा से हो रहा है। तो हम क्यू चिन्ता करें। परिणाम उसके हाथ में है कर्म हमारे हाथ में है"
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